तलाक कोई आसान रास्ता नहीं होता । यह न्यायालय में कई चंरणों से होके गुजरता हे। जानिए केसे । ?
तलाक कोई आसान रास्ता नहीं होता । यह न्यायालय में कई चंरणों से होके गुजरता हे। जानिए केसे । ? परिवार न्यायालय (फॅमिली कोर्ट ) में याचिका दाखिल होती है । : पति या पत्नी परिवार न्यायालय (फॅमिली कोर्ट ) में याचिका दाखिल करते है। यह याचिका या तो आपसी सहमति से या किसी विवादित आधार पर होती है , जैसे : क्रूरता , परित्याग , या विवाह के बाद किसी गैर मर्द से शारीरिक संबंद रखना । नोटिस और जबाब : कोर्ट दूसरा पक्ष बुलाता है । दूसरा पक्ष अपनी लिखित आपत्ति या जबाब दाखिल करता है। साक्ष्य और जिरह : दोनों और से गवाह और दस्तावेजी सबूत पैस होते है । वकील जिरह करते है । यही प्रक्रिया सबसे ज्यादा समय लेती है । मध्यस्थता का प्रयास : फॅमिली कोर्ट कई बार दोनों पक्षो को सुलह के लिए काउंसिलिंग या मध्यस्थता का मौका देती है । यदि समझोता नहीं होता है तो फिर केस आगे चलता है। फॅमिली कोर्ट का निर्णय ( डिक्री औफ़ डिवोर्से ): सारे सबूत और दलीले सुनने के बाद फॅमिली कोर्ट फैसला सुनाता है । तलाक की डिक्री जारी की जाती है।...