घरेलू हिंसा में सास ससुर और ननद का नाम क्यो जोड़ा जाता है। घरेलू हिंसा के मामलो में कई बार देखा गया है कि पत्नी शिकायत दर्ज कराते समय सिर्फ पति का नाम नहीं, बल्कि सास ससुर और ननद जैसे अन्य रिशेदारों के नाम भी शामिल कर देती है। ऐसा क्यों होता है? कई मामलों में यह कदम भावनात्मक तनाव, गुस्से या परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया जाता है। कभी-कभी यह सच भी होता है कि पति के अलावा अन्य परिजन भी मानसिक, आर्थिक या भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करते हैं। लेकिन बहुत से मामलों में रिश्तेदारों का नाम केवल केस को मजबूत दिखाने या पति के परिवार पर सामूहिक दबाव डालने के लिए जोड़ा जाता है। कोर्ट के कई निर्णयों में साफ किया गया है कि यदि किसी रिश्तेदार की घरेलू हिंसा में सीधी भूमिका या स्पष्ट सबूत नहीं है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। झूठे आरोप न केवल निर्दोष व्यक्तियों को परेशान करते हैं, बल्कि असली पीड़ितों के मामलों को भी कमजोर करते हैं। निष्कर्ष- जरूरी है कि घरेलू हिंसा के मामले में केवल उन्हीं लोगों का नाम शामिल किया जाए जिनकी भूमिका के ठोस प्रमाण मौजूद हों, ताकि न्याय का ...
क्या बिना इजाजत के कॉल रिकॉर्डिंग करना अपराध है ? जानिए कोर्ट का नजरिया आज के डिजिटल युग मे कॉल रिकॉर्डिंग आम बात होती जा रही है । लेकिन क्या बिना इजाजात के किसी की कॉल रिकॉर्डिंग करना कानूनी है ? इस पर सुप्रीम कोर्ट ओर विभिन्न हाईकोर्टस कही अहम फैसले दे चुकी है। जिससे यह स्पष्ट हो जाता है है की यह कब वैध है और कब गैर कानूनी हो जाता है। बिना सहमति के कॉल रिकॉर्डिंग और निजता का अधिकार सुप्रीम कोर्ट - (के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत सरकार, 2017) कोर्ट ने कहा है की बिना सहमति के किसी की बातचीत रिकॉर्ड करना निजता के अधिकार का उल्लंगन करना हो सकता है । कोई भी व्यक्ति या संस्था ऐसा तभी कर सकता है जब वह सार्वजनिक हित में हो या कानून की प्रक्रिया में हो। इलाहाबाद हाईकोर्ट - (मानव रंजन त्रिपाठी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, 2022) राजनीतिक व्यक्ति दुवारा की गई कॉल रिकॉर्डिंग सोश्ल मीडिया पर वाइरल की गई । कोर्ट ने इसे साफ तौर पर निजता का उल्ल्गन माना है । और कहा की अब आई टी ऐक्ट और BNS के तहत मामला बनता है । पति-पत्नी विवाद - (राजतिलक दास बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, 2009) पति दुवार...
CDR से जुड़ी अफबाहे बनाम सच्चाई - जानिए क्या हे सच ? आज के डिजिटल युग में सीडीआर (CDR) कॉल डिटेल्स रेकॉर्ड्स (Call Details Record) को लेके कई सारी गलत धारनाए बनी हुई है। आइए जानते हे क्या हे सच और क्या हे अफवाहे : अफवाह : कोई भी व्यक्ति किसी की भी आसानी से कॉल डिटेल्स निकलवा सकता है । सच : CDR (कॉल डिटेल्स रेकॉर्ड) एक गोपनीय डाटा है जिसे पुलिस, अदालत या सक्षम एजन्सि विधि प्रक्रिया के तहत निकलवा सकती है। अफवाह : CDR में Calls के अलावा बातचित की भी रिकॉर्डिंग होती हे। सच : CDR में सिर्फ Calls की डिटेल्स होती हे। जेसे समय , तारिक , नंबर एव अवधि होती है इसमे औडियो रिकॉर्डिंग नहीं होती है। अफवाह : वकील या आम आदमी पैसे देकर किसी की भी कॉल डिटेल्स निकलवा सकता है। सच : ऐसा करना गैर कानूनी है। और ऐसा कोई भी क्र्त्य IT act ओर टेलीग्राफ act के तहत अपराध माना जाएगा। अफवाह : CDR से पूरी लाइफ डिटेल्स निकल जाती है । सच : CDR सिर्फ टेलीकॉम डाटा देता है, न किसी की व्यक्तिगत या सामाजिक जिंदगी की पूरी तस्वीर । सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी की भी निजता (privacy) का उलंगन करना कानूनी अपराध है ।जब ...
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