CDR से जुड़ी अफबाहे बनाम सच्चाई - जानिए क्या हे सच ?
CDR से जुड़ी अफबाहे बनाम सच्चाई - जानिए क्या हे सच ?
आज के डिजिटल युग में सीडीआर (CDR) कॉल डिटेल्स रेकॉर्ड्स (Call Details Record) को लेके कई सारी गलत धारनाए बनी हुई है। आइए जानते हे क्या हे सच और क्या हे अफवाहे :
अफवाह: कोई भी व्यक्ति किसी की भी आसानी से कॉल डिटेल्स निकलवा सकता है ।
सच : CDR (कॉल डिटेल्स रेकॉर्ड) एक गोपनीय डाटा है जिसे पुलिस, अदालत या सक्षम एजन्सि विधि प्रक्रिया के तहत निकलवा सकती है।
अफवाह : CDR में Calls के अलावा बातचित की भी रिकॉर्डिंग होती हे।
सच : CDR में सिर्फ Calls की डिटेल्स होती हे। जेसे समय , तारिक , नंबर एव अवधि होती है इसमे औडियो रिकॉर्डिंग नहीं होती है।
अफवाह : वकील या आम आदमी पैसे देकर किसी की भी कॉल डिटेल्स निकलवा सकता है।
सच: ऐसा करना गैर कानूनी है। और ऐसा कोई भी क्र्त्य IT act ओर टेलीग्राफ act के तहत अपराध माना जाएगा।
अफवाह : CDR से पूरी लाइफ डिटेल्स निकल जाती है ।
सच : CDR सिर्फ टेलीकॉम डाटा देता है, न किसी की व्यक्तिगत या सामाजिक जिंदगी की पूरी तस्वीर ।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार किसी की भी निजता (privacy) का उलंगन करना कानूनी अपराध है ।जब तक किसी के लिए कोई वैध न्यायिक आधेश या आपराधिक जांच के लिए आवश्यक ना हो ।
सावधान रहें – किसी के CDR के अवैध उपयोग या प्राप्ति में शामिल होना एक दंडनीय अपराध है।
CDR प्राप्त करने का अधिकार किन्हें है?
1. पुलिस अधिकारी (ASI या उससे ऊपर के रैंक पर)
CDR की मांग सिर्फ तभी कर सकते हैं जब कोई जांच या अपराध से संबंधित उचित कारण हो।
2. कोर्ट के आदेश पर
जब किसी केस की सुनवाई या जांच में CDR ज़रूरी हो, तो कोर्ट खुद टेलीकॉम कंपनियों को आदेश जारी करता है।
3. IB, NIA, ED जैसी एजेंसियाँ
जो राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक अपराध या विशेष मामलों की जांच करती हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुमति होती है।
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