सिर्फ़ दो साल साथ रहे, कोर्ट में 17 साल तक लड़े – आखिरकार पति बन गया संन्यासी

सिर्फ दो साल साथ रहे, कोर्ट में 17 साल तक लड़े- आखिरकार पति बन गया सन्यासी 

पति-पत्नी का रिश्ता महज़ दो साल चला, लेकिन अदालतों में उनकी लड़ाई पूरे 17 साल तक खिंची रही। पत्नी ने पति और उसके परिवार पर अलग-अलग धाराओं में लगभग 10 केस दर्ज कराए। लंबे मुकदमों और मानसिक तनाव से थककर पति ने अंततः संन्यास ले लिया और साधु का जीवन अपना लिया।



विवाद की शुरुआत-
विवाह वर्ष 2005 में हुआ था, लेकिन 2007 में पत्नी घर छोड़कर चली गई। पति ने पारिवारिक न्यायालय शिवपुरी में तलाक का केस दायर किया। पत्नी ने इसका विरोध किया और पति व ससुराल वालों के खिलाफ लगातार केस दर्ज कराती रही।
अदालत में लंबा संघर्ष-
निचली अदालत ने 2015 में पति को तलाक की डिक्री दे दी, लेकिन पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की। इस बीच कानूनी विवादों और आपसी झगड़ों से परेशान पति ने संन्यासी बनने का निर्णय लिया।
हाईकोर्ट में समझौता-
हाईकोर्ट की दखल के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से तलाक पर राज़ी हुए। समझौते के तहत पति ने पत्नी को स्थायी भरण-पोषण के रूप में 6.15 लाख रुपये देने की शर्त मानी।
कानूनी टिप्पणी-
वैवाहिक विवादों का लंबा खिंचना न केवल पति-पत्नी के जीवन को बर्बाद करता है, बल्कि कई बार यह जीवन को ऐसे मोड़ पर ले जाता है जहाँ व्यक्ति पारिवारिक जीवन त्यागने को मजबूर हो जाता है।

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