हाई कोर्ट का बड़ा आदेश , 3 माह में दाखिला खारिज की अर्जियों का निस्तारण अनिवार्य है। लापरवाही पर अधिकारी होंगे अवमाना के दोषी

 हाई कोर्ट का बड़ा आदेश , 3 माह में दाखिला खारिज की अर्जियों का निस्तारण अनिवार्य है। लापरवाही पर अधिकारी होंगे अवमाना के दोषी 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के तहसीलदारों और एसडीओ (उप जिला अधिकारी) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि यदि दाखिल-खारिज की अर्जियों का निस्तारण तीन माह के भीतर नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारी सिविल अवमानना के दोषी माने जाएंगे।



हाईकोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार के परिपत्र या राजस्व संहिता के प्रावधानों को नजरअंदाज कर अर्जियों को लंबित रखना गंभीर लापरवाही है। यह सीधे तौर पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानी जाएगी। अदालत ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करें, अन्यथा उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने रामपुर जिले की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले में तहसीलदार पर आरोप था कि उन्होंने लंबे समय से दाखिल-खारिज की अर्जी लंबित कर रखी थी। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आवेदकों को अनावश्यक रूप से न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने आगे कहा कि दाखिल-खारिज जैसे राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है और यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इन मुद्दों पर हाईकोर्ट की शरण लेने को मजबूर होते हैं। अदालत ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि उसके द्वारा जारी सर्कुलर का पालन हर स्तर पर समयबद्ध ढंग से हो।
यह फैसला प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अहम कदम है। अब अधिकारियों पर सीधी जवाबदेही तय होगी और आम जनता को समय पर राजस्व मामलों में राहत मिलेगी।

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