लंबे समय तक साथ रहना वैवाहिक संबंध का प्रमाण:- सुप्रीम कोर्ट

 लंबे समय तक साथ रहना वैवाहिक संबंध का प्रमाण : सुप्रीमकोर्ट 

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक एक साथ पति-पत्नी की तरह रहते हैं, तो यह तथ्य अपने आप में विवाह संबंध का मजबूत प्रमाण माना जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल औपचारिक विवाह प्रमाणपत्र की गैरमौजूदगी से रिश्ते को नकारा नहीं जा सकता।
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
अदालत ने कहा कि समाज में ऐसे कई मामले सामने आते हैं जहां पति-पत्नी वर्षों तक साथ रहते हैं और समाज भी उन्हें पति-पत्नी के रूप में स्वीकार करता है। ऐसे में यदि पति इस रिश्ते से मुकरने की कोशिश करता है, तो लंबे समय तक साथ रहने का तथ्य ही विवाह का पर्याप्त सबूत है।
सामाजिक स्वीकार्यता महत्वपूर्ण-
न्यायालय ने कहा कि विवाह सिर्फ औपचारिक दस्तावेज़ या पंजीकरण से प्रमाणित नहीं होता, बल्कि साथ रहने और समाज में रिश्ते की स्वीकृति भी विवाह का महत्वपूर्ण आधार है। अदालत ने यह भी माना कि यदि दोनों पक्षों ने लम्बे समय तक पति-पत्नी की तरह जीवन जिया है, तो यह “कॉन्ट्रैक्चुअल रिलेशनशिप” नहीं बल्कि विवाह संबंध माना जाएगा।
कानूनी प्रभाव-
इस फैसले से उन मामलों में बड़ा फर्क पड़ेगा जहां महिला अपने अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाती है लेकिन पुरुष विवाह से इंकार कर देता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि लंबे समय तक साथ रहना विवाह को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है।

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