झूठे मुकदमों में पति का पूरा परिवार आरोपी नहीं माना जाएगा:-सुप्रीम कोर्ट

 झूठे मुकदमों में पति का पूरा परिवार आरोपी नहीं माना जाएगा: सुप्रीमकोर्ट 

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवादों में पत्नी की शिकायत पर पति के पूरे परिवार को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।







अदालत ने माना कि कई बार महिलाएं घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न की शिकायतों में पति के साथ-साथ ससुर, सास, ननद और यहां तक कि दूर के रिश्तेदारों के नाम भी शामिल कर देती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह का कदम न केवल कानून का दुरुपयोग है बल्कि समाज में परिवार नामक संस्था को भी कमजोर करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल वही व्यक्ति आरोपी होगा जिसके खिलाफ सीधे तौर पर उत्पीड़न या अत्याचार का ठोस आरोप और सबूत मौजूद हो। केवल रिश्तेदार होने के नाते किसी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि वैवाहिक विवादों में निष्पक्ष जांच बेहद ज़रूरी है, ताकि निर्दोष लोगों को अनावश्यक रूप से मुकदमों में न फंसाया जाए।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दहेज और घरेलू हिंसा के मामलों में अक्सर देखा जाता है कि पूरा परिवार अदालतों में खड़ा होता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि झूठे मुकदमे न केवल पति-पत्नी के रिश्तों को खत्म करते हैं बल्कि समाज में आपसी विश्वास और सामंजस्य को भी नुकसान पहुँचाते हैं। अदालत ने राज्य सरकारों और पुलिस को निर्देश दिया कि वे ऐसे मामलों की जांच निष्पक्षता और पारदर्शिता से करें और केवल उन्हीं लोगों को आरोपी बनाएं जिन पर आरोप गंभीर और प्रमाणिक हों।
यह फैसला न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि यह निर्दोष रिश्तेदारों को झूठे आरोपों से बचाएगा और साथ ही असली दोषियों को सज़ा दिलाने का रास्ता भी साफ करेगा।

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