शादी के झूठे वादे पर संबंध बनाना बलात्कार नहीं:- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

 शादी के झूठे वादे पर संबंध बनाना बलात्कार नहीं : पंजाब एव हरियाणा हाईकोर्ट 

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट-
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि केवल विवाह के झूठे वादे के आधार पर बने यौन संबंधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376/पूर्व IPC 376 के अंतर्गत बलात्कार नहीं माना जा सकता।



अदालत की टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि मुकदमे को निष्प्रभावी करने के लिए पर्याप्त गंभीर अवैधता नहीं है। फैसले में यह भी दर्ज किया गया "अपीलकर्ता स्पष्ट रूप से विवाह के आश्वासन पर उसे अंतरंगता के लिए प्रेरित करने की स्थिति में नहीं था, वह भी उसके अपने ससुराल में जहां उसके ससुराल वाले और बच्चे भी मौजूद होते। यह दावा कि अपीलकर्ता ने विवाह के वादे के आधार पर उसे यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया और उसके साथ बलात्कार किया, पूरी तरह से गलत है।"
सहमति आधारित संबंध, आपराधिक मामला नहीं
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि यह मामला दरअसल सहमति से बने रिश्ते के बिगड़ने का है और इसे आपराधिक कानून का आधार बनाकर प्रतिशोध के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कोर्ट का फैसला-
न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे सहमति-आधारित रिश्तों को IPC की धारा 376 (अब BNS की धारा 64) के गंभीर आरोप के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसलिए अपील स्वीकार कर ली गई और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया गया।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि यदि कोई विवाहित महिला किसी पुरुष से शादी के झूठे वादे पर लंबे समय तक यौन संबंध बनाती है, तो इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता।
यह मामला एक विवाहित महिला द्वारा दर्ज कराए गए बलात्कार के आरोप से जुड़ा था, जिसमें उसने कहा कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 9 वर्ष की सजा को रद्द करते हुए कहा कि—

महिला पहले से विवाहित थी और पति से अलग भी नहीं हुई थी। शादी के झूठे वादे पर बने संबंध को सहमति-आधारित माना जाएगा। ऐसा संबंध "व्यभिचार" (adultery) हो सकता है, लेकिन इसे बलात्कार जैसे गंभीर अपराध का आधार नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता न तो मासूम थी और न ही भोली-भाली, बल्कि वह दो बच्चों की मां थी और आरोपी से उम्र में 10 साल बड़ी थी।
अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में "शादी का झूठा वादा" अपने आप में बलात्कार का आधार नहीं बनता, जब तक कि महिला अविवाहित और आश्रित स्थिति में न हो।

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