वादा करने के बाद प्रेमी का विवाह न करना अपराध नहीं:-हाईकोर्ट
वादा करने के बाद प्रेमी का विवाह न करना अपराध नहीं : हाई कोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यदि कोई विवाहित महिला अपने प्रेमी पर विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाती है, तो यह आरोप अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा।
न्यायालय ने अभियुक्त को दुराचार और उत्पीड़न के आरोप से उन्मोचित करने के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि इस मामले में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से यह स्पष्ट नहीं होता कि आरोपी ने महिला को धोखा देने की नीयत से विवाह का वादा किया था।
मामला क्या था?
पीड़िता ने अभियुक्त पर आरोप लगाया कि उसने विवाह का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में विवाह से इंकार कर दिया। उसने अभियुक्त के खिलाफ 2023 में एफआईआर दर्ज कराई थी।
अदालत के सामने आए तथ्यों के अनुसार, पीड़िता स्वयं विवाहित थी और अभियुक्त के साथ लंबे समय से संबंध में थी। पीड़िता का आरोप था कि अभियुक्त ने विवाह का वादा कर उसका शोषण किया।
हाईकोर्ट का अवलोकन
हाईकोर्ट ने कहा कि—
विवाहित महिला के साथ विवाह का वादा अपने आप में अवैध है क्योंकि विधि सम्मत विवाह संभव ही नहीं है।
अभियुक्त द्वारा विवाह न करने को अपराध नहीं माना जा सकता।
रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि अभियुक्त ने शुरुआत से ही धोखा देने की नीयत से वादा किया था।
आदेश-
अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अभियुक्त को आरोपों से मुक्त किया गया था।

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