गिरफ्तार हुए पीएम, CM और मंत्रियों को हटाने वाला बिल बनाने के पीछे क्या वजह? जानिए विधेयक की अहम बातें.
गिरफ्तार हुए पीएम, CM और मंत्रियों को हटाने वाला बिल बनाने के पीछे क्या वजह? जानिए विधेयक की अहम बातें।
सरकार ने जेल में बंद नेताओं को पद पर बने रहने से रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया है. यह कदम हाल के दिनों में ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद उठाया गया है, जब नेता जेल में रहने के बावजूद पद पर बने रहे.
केंद्र सरकार ने एक ऐसा बिल पेश किया है, जिसके तहत जेल में बंद कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अपने पद पर नहीं रह पाएगा. इस बिल को लाने के इस बिल को लाने के पीछे गृह मंत्री ने तर्क दिया, "आप जेल की कोठरी से भारत पर शासन नहीं कर सकते." यह फैसला पूरे देश में हाल ही में सामने आए ऐसे मामलों को देखते हुए लिया गया है।
1. शीर्षक और प्रारंभ (Short title and commencement)
इस अधिनियम को संविधान (एक सौ तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 2025 कहा जाएगा।
यह उस दिन से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना द्वारा घोषित करेगी।
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2. अनुच्छेद 75 में संशोधन (केंद्र स्तर पर)
नए उपबंध (5A) जोड़े गए।
यदि कोई केंद्रीय मंत्री 30 लगातार दिनों तक किसी अपराध (जिसकी सजा 5 वर्ष या उससे अधिक हो सकती है) के आरोप में गिरफ्तार और हिरासत में रहता है:
तो प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति उस मंत्री को पद से हटा देंगे।
यदि प्रधानमंत्री 31वें दिन तक सलाह नहीं देते, तो मंत्री अपने-आप पद से हट जाएगा।
यदि प्रधानमंत्री स्वयं ऐसे अपराध में 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो:
उसे 31वें दिन तक इस्तीफ़ा देना होगा।
अगर इस्तीफ़ा नहीं देता, तो वह अपने-आप प्रधानमंत्री पद से हट जाएगा।
रिहा होने के बाद वही व्यक्ति दोबारा प्रधानमंत्री या मंत्री बन सकता है।
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3. अनुच्छेद 164 में संशोधन (राज्य स्तर पर)
नए उपबंध (4A) जोड़े गए।
यदि कोई राज्य मंत्री 30 लगातार दिनों तक गंभीर अपराध (सजा 5 साल या अधिक) में हिरासत में रहता है:
तो मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल उसे पद से हटा देंगे।
यदि सलाह 31वें दिन तक नहीं दी गई, तो मंत्री अपने-आप पद से हट जाएगा।
यदि मुख्यमंत्री स्वयं ऐसे अपराध में 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो:
उसे 31वें दिन तक इस्तीफ़ा देना होगा।
इस्तीफ़ा न देने पर वह अपने-आप मुख्यमंत्री पद से हट जाएगा।
रिहा होने के बाद वही व्यक्ति दोबारा मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है।
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4. अनुच्छेद 239AA में संशोधन (दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान)
नए उपबंध (5A) जोड़े गए।
यदि दिल्ली सरकार का कोई मंत्री 30 दिनों तक गंभीर अपराध में हिरासत में रहता है:
तो मुख्यमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति उसे पद से हटा देंगे।
अगर सलाह 31वें दिन तक नहीं दी गई, तो वह मंत्री अपने-आप पद से हट जाएगा।
यदि मुख्यमंत्री (दिल्ली के) खुद 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो:
उन्हें 31वें दिन तक इस्तीफ़ा देना होगा।
अगर इस्तीफ़ा नहीं देते, तो पद अपने-आप समाप्त हो जाएगा।
रिहा होने के बाद वही व्यक्ति दोबारा मुख्यमंत्री या मंत्री बन सकता है।
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5. उद्देश्यों और कारणों का विवरण (Statement of Objects and Reasons)
जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से उम्मीद करती है कि वे ईमानदार और स्वच्छ छवि वाले हों।
मंत्री पर गंभीर अपराध का आरोप लगना और हिरासत में रहना संवैधानिक नैतिकता और सुशासन के सिद्धांतों के विपरीत है।
संविधान में पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि मंत्री या मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री को ऐसे मामलों में हटाया जा सके।
इसलिए अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन करके यह प्रावधान जोड़ा गया है।
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👉 आसान शब्दों में:
अब प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री 30 दिन से ज़्यादा जेल में रहा, और अपराध की सज़ा 5 साल या उससे अधिक की हो सकती है, तो उसका पद अपने-आप समाप्त हो जाएगा।

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