घरेलू हिंसा में सास ससुर और ननद का नाम क्यो जोड़ा जाता है।
घरेलू हिंसा में सास ससुर और ननद का नाम क्यो जोड़ा जाता है। घरेलू हिंसा के मामलो में कई बार देखा गया है कि पत्नी शिकायत दर्ज कराते समय सिर्फ पति का नाम नहीं, बल्कि सास ससुर और ननद जैसे अन्य रिशेदारों के नाम भी शामिल कर देती है। ऐसा क्यों होता है? कई मामलों में यह कदम भावनात्मक तनाव, गुस्से या परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया जाता है। कभी-कभी यह सच भी होता है कि पति के अलावा अन्य परिजन भी मानसिक, आर्थिक या भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करते हैं। लेकिन बहुत से मामलों में रिश्तेदारों का नाम केवल केस को मजबूत दिखाने या पति के परिवार पर सामूहिक दबाव डालने के लिए जोड़ा जाता है। कोर्ट के कई निर्णयों में साफ किया गया है कि यदि किसी रिश्तेदार की घरेलू हिंसा में सीधी भूमिका या स्पष्ट सबूत नहीं है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। झूठे आरोप न केवल निर्दोष व्यक्तियों को परेशान करते हैं, बल्कि असली पीड़ितों के मामलों को भी कमजोर करते हैं। निष्कर्ष- जरूरी है कि घरेलू हिंसा के मामले में केवल उन्हीं लोगों का नाम शामिल किया जाए जिनकी भूमिका के ठोस प्रमाण मौजूद हों, ताकि न्याय का ...
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