कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई महिला किसी नाबालिग लड़के को अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित या नियंत्रित करती है, तो यह कृत्य भी POCSO एक्ट की धारा 3 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
कर्नाटका हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई महिला किसी नाबालिङ्ग लड़के को अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित या नियंत्रित करती है, तो यह क्रत्य भी POSCO अक्त की धारा 3 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई महिला किसी नाबालिग लड़के को अपने साथ यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित या नियंत्रित करती है, तो यह कृत्य भी POCSO एक्ट की धारा 3 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
मामला क्या था?
52 वर्षीय महिला के खिलाफ दर्ज POCSO केस को रद्द करने की मांग की गई थी। दलील दी गई कि POCSO का उद्देश्य केवल पुरुषों द्वारा बच्चियों के शोषण को रोकना है, न कि महिलाओं द्वारा किए गए कृत्यों को।
कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि –
POCSO का उद्देश्य केवल शारीरिक भिन्नताओं को औपचारिक रूप से पहचानना नहीं है, बल्कि बच्चों को हर प्रकार के यौन शोषण से सुरक्षा देना है।
यदि किसी भी रूप में नाबालिग को यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर या उकसाया जाता है, चाहे आरोपी पुरुष हो या महिला, वह POCSO के तहत दंडनीय अपराध होगा।
कानूनी महत्व-
यह निर्णय बताता है कि लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए अदालतें बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। महिलाओं द्वारा नाबालिग लड़कों का यौन शोषण भी अब उतनी ही गंभीरता से लिया जाएगा जितना पुरुषों द्वारा नाबालिग लड़कियों का।

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