गवाही जिस भाषा में दी जाए, उसी में रिकॉर्ड हो — केवल अंग्रेज़ी की परंपरा अनुचित:-सुप्रीम कोर्ट
गवाही जिस भाषा में दी जाए, उसी में रेकॉर्ड हो - केवल अँग्रेजी की परंपरा अनुचित : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गवाह की गवाही उसी भाषा में दर्ज की जाए, जिस भाषा में वह गवाही दे रहा है। केवल अंग्रेज़ी में रिकॉर्ड करना न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
अदालत ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 277 स्पष्ट रूप से निर्देश देती है कि यदि गवाह अंग्रेज़ी के अलावा किसी अन्य भाषा में गवाही देता है, तो उसे उसी भाषा में रिकॉर्ड किया जाए। अनुवाद की स्थिति में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि गवाह के शब्दों का वास्तविक अर्थ और भाव सुरक्षित रहे।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस मामले में आई जिसमें एक गवाह की हिंदी में दी गई गवाही को अंग्रेज़ी में दर्ज किया गया था। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से गवाह के असली बयान का अर्थ बदल सकता है और न्याय प्रभावित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय निचली अदालतों के लिए मार्गदर्शन है और इससे यह सुनिश्चित होगा कि न्यायिक प्रक्रिया आम लोगों की भाषा में भी समान रूप से सुरक्षित रहे।
Comments
Post a Comment