कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला-पत्नी के दोस्तों और परिवार के लगातार घर पर रहने को क्रूरता माना, पति को तलाक की मंजूरी:-
कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला पत्नी के दोस्तो और परिवार के लगातार घर पर रहने को क्रूरता माना, पति को तलाक की मंजूरी:
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण तलाक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि पत्नी के दोस्त और परिवार का सदस्य लगातार पति की मर्जी के बिना घर में रहते हैं और पति इससे असहज महसूस करता है, तो इसे वैवाहिक क्रूरता माना जा सकता है।
मामले में पति ने याचिका दायर की थी क्योंकि उसकी पत्नी ज्यादातर समय अपनी मित्र के साथ ही बिताती थी और उसका मित्र हर वक्त घर में रहता था। इस वजह से पति मानसिक और भावनात्मक रूप से असहज महसूस कर रहा था।
निचली अदालत ने पहले तलाक देने से इनकार किया था, लेकिन याचिकाकर्ता ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पति के तर्क को सही मानते हुए तलाक की मंजूरी दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्नी का यह रवैया पति के लिए क्रूरता के समान है और विवाह में दोनों पक्षों की मानसिक शांति और सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
मुख्य बातें-
1-पत्नी के दोस्त और परिवार का पति की मर्जी के बिना घर में लगातार रहना क्रूरता के बराबर माना गया।
2-तलाक की मंजूरी इस आधार पर दी गई कि पति असहज और मानसिक तनाव में था।
3-यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि विवाह केवल पति-पत्नी के अधिकार का मामला नहीं है, बल्कि इसमें दोनों पक्षों की सहमति, सम्मान और मानसिक शांति भी जरूरी है।
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