दिल्ली हाई कोर्ट ने एक एडल्टरी (व्यभिचार) मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक एडल्टरी (व्यभिचार) मामले में बड़ा फैसला सुनाया है । 

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक एडल्टरी (व्यभिचार) मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पति को बरी करते हुए कहा कि "पत्नी को पति की संपत्ति मानने की सोच अब असंवैधानिक है"।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पारंपरिक सोच जिसमें पत्नी को पति की सारी संपत्ति और अधिकार मान लिया जाता था, संपूर्ण भारतीय संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने यह उदाहरण देते हुए कहा कि "द्रौपदी की कोई आवाज़ नहीं थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया"।
इस फैसले से यह साफ़ हो गया कि पति या पत्नी के खिलाफ गलत विचार या संपत्ति पर नियंत्रण की धारणा अब कानून द्वारा समर्थित नहीं है। अदालत ने कहा कि विवाह केवल पारस्परिक सम्मान, विश्वास और साझेदारी का संबंध है, और किसी भी पक्ष का व्यक्तिगत अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है।
मुख्य बिंदु-

1-पति की संपत्ति को पत्नी का अधिकार मानना असंवैधानिक है।
2-व्यभिचार (Adultery) के मामलों में आरोपी को बिना पर्याप्त साक्ष्य के दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
3-अदालत ने पारंपरिक और असंवैधानिक विचारों को स्पष्ट रूप से खारिज किया।

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