तलाकशुदा पत्नी भरण-पोषण की हकदार, चाहे तलाक का आधार या तरीका कुछ भी हो:-दिल्ली हाईकोर्ट

तालकशुदा पत्नी भरण - पोषण की हकदार, चाहे तलाक का आधार या तरीका कुछ भी हो : दिल्ली हाईकोर्ट 

तलाकशुदा पत्नी भरण-पोषण की हकदार, चाहे तलाक का आधार या तरीका कुछ भी हो:-दिल्ली हाईकोर्ट
केस शीर्षक-Umar Haris v. Yusra Meraj & Anr., Crl. Rev. P. 345/2024
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तलाकशुदा पत्नी भरण-पोषण पाने की हकदार होती है, चाहे तलाक का आधार या तरीका कुछ भी क्यों न हो। अदालत ने कहा कि CrPC की धारा 125 का उद्देश्य पत्नी और बच्चों को भूखों मरने से बचाना है और इसका लाभ किसी भी तलाकशुदा पत्नी को उपलब्ध है।
मामला-
याचिकाकर्ता पति ने फैमिली कोर्ट में लंबित पत्नी की भरण-पोषण याचिका को चुनौती दी थी। दोनों पक्षों का विवाह वर्ष 2018 में इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ और 2019 में एक पुत्र का जन्म हुआ। वैवाहिक विवादों के चलते वर्ष 2021 में तलाक-ए-खुला के माध्यम से विवाह विच्छेद हुआ। तलाक के समय पत्नी व पुत्र को 33 लाख रुपये “पूर्ण और अंतिम निपटान” (full and final settlement) के रूप में दिए गए।
इसके बावजूद, पत्नी ने वर्ष 2023 में अपने और नाबालिग पुत्र के लिए ₹1,20,000 मासिक भरण-पोषण की मांग करते हुए CrPC की धारा 125 के तहत याचिका दायर की।
अदालत की टिप्पणी-
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा-
“यह ध्यान रखना उचित है कि एक बार जब पत्नी तलाक ले लेती है तो वह CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण पाने की हकदार होती है, चाहे तलाक का आधार या तरीका कुछ भी हो।”
अदालत ने पति की यह दलील खारिज कर दी कि पूर्व समझौता होने के कारण पत्नी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग बच्चे का भरण-पोषण सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस आधार पर याचिका को रद्द नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैमिली कोर्ट का दायित्व है कि वह यह तय करे कि क्या पति ने पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार किया है अथवा लापरवाही बरती है और क्या पत्नी स्वयं अपने भरण-पोषण में असमर्थ है।
निष्कर्ष-
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कहा कि याचिका सुनवाई योग्य है। अब ट्रायल कोर्ट ही इस बात पर निर्णय करेगा कि पत्नी और पुत्र को कितना अंतरिम व अंतिम भरण-पोषण मिलना चाहिए।

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