फर्जी SC-ST एक्ट केस दर्ज कराने वाली महिला को डेढ़ साल की सजा
फर्जी SC- ST एक्ट केस दर्ज कराने वाली महिला को डेढ़ साल की सजा
चुनावी रंजिश में ग्राम प्रधान पर झूठा SC-ST एक्ट का मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला को अदालत ने डेढ़ साल कैद की सजा सुनाई है।
अदालत ने साफ कहा कि यह कानून दलित और आदिवासी समाज की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराना न केवल निर्दोषों को परेशान करता है बल्कि असली पीड़ितों के लिए न्याय पाना भी कठिन बना देता है।
अदालत ने आदेश दिया कि अगर महिला को कोई राहत राशि दी गई है तो उसे वापस लिया जाए।
कोर्ट ने यह भी चेताया कि करदाताओं का पैसा झूठे मुकदमों पर बर्बाद नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने यह चिंता जताई कि पंचायती चुनावों में दुश्मनी के कारण समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है और निर्दोष लोगों को बेवजह फंसाया जा रहा है।
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