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शादीशुदा पुरुष के साथ अपनी मर्जी से रह सकती है बालिग महिला:-मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

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  शादीशुदा पुरुष के साथ अपनी मर्जी से रह सकती है बालिंग महिला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि यदि कोई महिला बालिग है, तो उसे पूरा अधिकार है कि वह अपनी इच्छा से किसी भी व्यक्ति के साथ रह सके, चाहे वह व्यक्ति विवाहित ही क्यों न हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी बालिग महिला को शादीशुदा पुरुष के साथ रहने से रोक सके। अदालत की टिप्पणी- यह फैसला बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने कहा कि अगर कोई महिला शादीशुदा पुरुष से विवाह करती है, तो द्विविवाह का मामला केवल पहली पत्नी ही दर्ज करा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह नैतिकता के मामलों में दखल नहीं देगा। हाईकोर्ट का निर्देश- महिला बालिग है, इसलिए उसे यह तय करने का अधिकार है कि वह किसके साथ रहे। महिला ने अपने माता-पिता के साथ न रहने की इच्छा जताई। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि महिला और जिस व्यक्ति के साथ वह रहना चाहती है, उनसे लिखित वचनपत्र लेकर उसे रिहा किया जाए। #Highcourt #LegalRights #WomenRights #MadhyaPradeshNews #LiveInRelationship #Law...

सामूहिक दुष्कर्म का झूठा केस कराने पर वकील को उम्रकैद:-

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 सामूहिक दुष्कर्म का झूठा केस कराने पर वकील को उम्रक़ैद : लखनऊ विशेष अदालत ने वकील परमजीत गुप्ता को सामूहिक दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट के तहत झूठा केस दर्ज कराने के मामले में दोषी पाते हुए उम्रकैद और 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पूरा मामला क्या है? वकील परमजीत गुप्ता ने पूजा रावत के जरिए अरविंद यादव और अवनीश यादव पर सामूहिक दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए। पुलिस जांच में मामला झूठा निकला। अदालत ने पाया कि विवाद केवल संपत्ति और लेन-देन को लेकर था। फर्जी केस दर्ज कराकर समाज व न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। अदालत की टिप्पणी सह-अभियुक्त पूजा रावत को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। अदालत ने कहा कि “फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की प्रवृत्ति न्यायपालिका और समाज दोनों के लिए खतरनाक है।” कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों पर आईटी टूल्स से निगरानी हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। महत्वपूर्ण निर्देश- अदालत ने कहा कि ऐसे वकीलों की प्रैक्टिस पर रोक लगाई जानी चाहिए जो झूठे केस कराकर कानून का दुरुपयोग करते हैं। आदेश की कॉपी बार काउंसिल को भी भेजी जाएगी ताकि आगे ऐसे मामलों...

हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश अब दो के बजाय एक जमानतदार से भी मिलेगी रिहाई

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 हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश अब दो के बजाय एक जमानतदार से भी मिलेगी रिहाई  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अब आरोपी को जेल से रिहा कराने के लिए दो जमानतदार की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि केवल एक जमानतदार भी पर्याप्त होगा। अदालत ने प्रदेश के सभी जिला न्यायाधीशों को इस आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है। क्या कहा हाईकोर्ट ने? हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी आरोपी की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वह दो जमानतदार उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो उसकी रिहाई में बाधा नहीं आनी चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जमानत बॉन्ड की राशि आरोपी की आर्थिक क्षमता के अनुरूप तय की जानी चाहिए। याचिका पर सुनवाई- याची बच्ची देवी ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की थी। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए साफ किया कि जमानत देने के लिए एक सक्षम जमानतदार भी पर्याप्त है। अहम बिंदु- अब आरोपी को रिहाई के लिए दो जमानतदार की जरूरत नहीं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत मिलेगी। जमानत बॉन्ड की राशि आरोपी की वित्तीय स्थिति देखकर तय की जाएगी। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो आर्थिक कठिनाइ...

स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो शादी के रिश्ते में न बंधें:-सुप्रीम कोर्ट

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स्वतंत्र रहना चाहते है तो शादी के रिश्ते में न बंधे : सुप्रीमकोर्ट  सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि पति-पत्नी विवाह के बंधन में बंधे हैं, तो वे यह नहीं कह सकते कि वे एक-दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहते। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह का अर्थ ही आपसी सहयोग और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाना है। कोर्ट की टिप्पणी- जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि यदि कोई स्वतंत्र रहना चाहता है, तो उसे शादी नहीं करनी चाहिए। विवाह का अर्थ दो व्यक्तियों का आपसी सहारा और दायित्वों को साझा करना है। पत्नी की दलील- सुनवाई के दौरान पत्नी ने कहा कि वह नौकरी के लिए सिंगापुर में रहना चाहती हैं और पति पर आर्थिक या भावनात्मक रूप से निर्भर नहीं रहना चाहतीं। पत्नी ने कहा कि उनका इरादा आत्मनिर्भर रहना है और वे पति या परिवार पर किसी तरह की निर्भरता नहीं चाहतीं। कोर्ट का जवाब- कोर्ट ने कहा कि विवाह के बाद यह कहना कि आप किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते, संभव नहीं है। भावनात्मक और पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना विवाह का हिस्सा है। अदालत ने पत्नी को सोचने के लिए समय दिया और कहा कि इस पर पुनर्व...

अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार है । केंद्र सरकार ने कहा माता - पिता पर निर्भर रही बेटी पेंशन की हकदार

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अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार है । केंद्र सरकार ने कहा माता - पिता पर निर्भर रही बेटी पेंशन की हकदार  केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा में स्पष्ट किया है कि मृत सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियाँ भी पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार होंगी। सरकार का स्पष्टीकरण- लोकसभा में सरकार ने कहा कि यदि किसी मृतक कर्मचारी या पेंशनभोगी की पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र जीवनसाथी या पुत्र न हो, तो उनकी अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियाँ यह पेंशन प्राप्त कर सकती हैं। बशर्ते वे अन्य शर्तों को पूरा करती हों। पात्रता की शर्तें- बेटी अपने माता-पिता पर पूरी तरह निर्भर रही हो। बेटी की पुनर्विवाह की स्थिति न हो। बेटी अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा हो। पात्रता जीवनभर बनी रहेगी, जब तक पुनर्विवाह न हो जाए। रेलवे और रक्षा कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान रेलवे और रक्षा विभाग में भी यही नियम लागू होंगे। पेंशन तब तक जारी रहेगी जब तक बेटी की शादी नहीं हो जाती या पुनर्विवाह नहीं हो जाता। सरकार का उद्देश्य- केंद्र का यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत...

गिरफ्तार हुए पीएम, CM और मंत्रियों को हटाने वाला बिल बनाने के पीछे क्या वजह? जानिए विधेयक की अहम बातें.

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गिरफ्तार हुए पीएम, CM और मंत्रियों को हटाने वाला बिल बनाने के पीछे क्या वजह? जानिए विधेयक की अहम बातें। सरकार ने जेल में बंद नेताओं को पद पर बने रहने से रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया है. यह कदम हाल के दिनों में ऐसे कई मामलों के सामने आने के बाद उठाया गया है, जब नेता जेल में रहने के बावजूद पद पर बने रहे.  केंद्र सरकार ने एक ऐसा बिल पेश किया है, जिसके तहत जेल में बंद कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अपने पद पर नहीं रह पाएगा. इस बिल को लाने के इस बिल को लाने के पीछे गृह मंत्री ने तर्क दिया, "आप जेल की कोठरी से भारत पर शासन नहीं कर सकते." यह फैसला पूरे देश में हाल ही में सामने आए ऐसे मामलों को देखते हुए लिया गया है। संविधान (130वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 आइये समझते है सरल भाषा में । 1. शीर्षक और प्रारंभ (Short title and commencement) इस अधिनियम को संविधान (एक सौ तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 2025 कहा जाएगा। यह उस दिन से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना द्वारा घोषित करेगी। --- 2. अनुच्छेद 75 में संशोधन (केंद्र स्तर पर) नए उपबंध (5A) जोड़...

बिना उचित कारण अलग रह रही पत्नी गुजारा भत्ता की हकदार नहीं : हाईकोर्ट

  बिना उचित कारण अलग रह रही पत्नी गुजारा भत्ता की  हकदार नहीं : हाईकोर्ट  इलाहबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बिना किसी उचित कारण पति से अलग रह रही हे तो वह गुजारा भत्ता की हकदार नहीं है ।  इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मोनिका गुप्ता की ओर से दायर आपराधिक पुरीक्ष्ण अर्जी खारिज कर दी । यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की एकल पीठ ने दिया। फ़तेहपुर निवासी मोनिका गुप्ता और अंबर गोयल की शादी पाँच फरवरी, 2017 को हुई थी । कुछ दिनो बाद दोनों के बीच संबंध खराब हो गए । इसके बाद पति व उसके परिवार के सदस्यो पर शारीरिक-मानसिक प्रतांडना का आरोप लगा मोनिका गुप्ता जून, 2017 से मायके में रहने लगी । उन्होने गुजारा भत्ता के लिए 19 सितंबर, 2018 को पारिवारिक न्यायालय में अर्जी दाखिल की । दावा किया कि उनके पास गुजारा करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं है । पारिवारिक न्यायालय ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। इस पर मोनिका ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की । अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के पति बैंक में मैनेजर है । पति व उसके परिजन दहेज के लिए मारपीट कर मोनिका गुप्ता को घर से निकाल दिया है ।...